Story in Hindi -save the girls child

Story in hindi
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Story in Hindi एक तरफ जहां

आज सुबह की पहली किरण के साथ ही यह निश्चित हो चुका था कि आज कुछ न कुछ जरूर होने वाला है चाय की चुस्की के साथ मेरी नजर एक कोने में पड़े अखबार के टुकड़े पर पड़ी जिसमें लिखा थासालभर पहले हुई मा की मौत घर में कैद पिंजरपढ़ते ही लगा जीवन के क्या मायने हैं समझ नही आता जो मां अपने बच्चे के खबर हर समय रखती हैं एक पल भी अपने से दूर नहीं रख सकती ऐसा क्या हुआ कि उसी बेटे को अपनी मुंबई में रह रही मां की खबर लेने के लिए साल भर लगीं खैर
एक ओर दिन भर की आपा धापी तो दूसरी ओर रुपए हासिल करने की होड़ साला ये पैसा भी क्या चीज है शाशक-शाशित शोषक-शोषित,बड़ा -छोटा,उदार- कंजूस धार्मिक- अधार्मिक रंगीला, शौकीन,बलात्कारी कल्याणकारी  मेहनती कामचोर कठोर - सहृदय,समझदार - बेवकूफ़ ईमानदार- बेईमानपामार- श्रेष्ठ राजनेता  चमचा और न जाने दुनिया के कौन कौन से अवॉर्ड दिला देता हैं
सच ही कहा है कि धनबान को गुणी व बुद्धिमान का खिताब इस प्रकार दिया जाता है जैसे निरमा साबुन के साथ लक्स की बट्टी फ्री दी जा रही है! इसी विचार में राही चला गया उस पथ की ओर जहां सिर्फ एक पागल या कवि ही जा सकता है फिर अंतर्मन की गहराइयों में डूबता हुआ कवि जैसे तंद्रा में चला जाता है वह योग शक्ति द्वारा अंतरिक्ष में विचरण कर रहा है तभी उसे क्रंदन का स्वर सुनाई दिया वहां अंतरिक्ष का एक ग्रह था तेना टोनियास राही एक स हिरदय था तो उसने सोचा क्यों ना मुझे इस टेना टोनियस पर चल कर देखना चाहिए तथा हर संभव मदद भी करनी चाहिए क्योंकि हम प्रथ्वीवासियों का मूल मंत्र है सर्वे भवन्तु सुखिन सर्वे संतु निरामया सर्वे भद्राणि पश्यंतु  इसलिए मैने अपना योग विमान वही रोक दिया
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                            तथा उतर पड़ा उस सुंदर से उपग्रह टेना टनियस पर जैसे ही आगे बढ़ा मुझे जोर दार झटका लगा कि उस ग्रह पर सभी लोग सिर्फ पुरुष ही थे महिला एक भी नहीं थी तथा समस्त पुरुष जराबस्था की ओर अग्रसर बड़ी जोर जोर से क्रंदन कर रहे थे मैने एक अधेड़ से पूछा,चाचा क्या हुआ? मैं जहां भी गया वहां सम्पूर्ण ग्रह पर लोग सिर्फ रो रहे थे इतना सुनना था कि वह अधेड़ फफक फफक कर रो पड़ा कि हमने अपना सर्वस्व नष्ट कर दिया बेटा धन धर्म से हीन हो गए हम और अब हममें से इस ग्रह पर  कोई भी जीवित नहीं बचेगा इतना कहते कहते वह अधेड़ जोर जोर से क्रंदन करने लगा तथा गश खाकर बेहोश हो गया राही परेशान एक वार्गी तो राही को लगा कि यहां हाइड्रोजन बम से हमला होने वाला है या फिर यह ग्रह ब्रह्मांड के किसी दूसरे ग्रह से टकराने वाला है तभी मैने एक रोते हुए जाते व्यक्ति से पूछना चाहा तो वह रोते हुए क गया क़यामत आ गई
एक बारगी तो राही को लगा कि वह पागलों के देश में आ गया है सब साले रो रहे है रोने से क्या हासिल होगा अगर कर्म करोगे तो ही तो फल मिलेगा। रोने से अंधे हो सकते हो चूंकि राही जो ठहरा हिंदुस्थान का।भाई गीता में लिखा हैहै   कर्मण्य वधिकरा स्ते मा फलेशु कदाचन राही को लगा कि उसे और एक प्रयास करना चाहिए राही ने अगले एक व्यक्ति से पूछना चाहा संभवत कोई भारतीय नेता  जैसा राही ने जैसे ही अंदर प्रवेश करना चाहा तो राही को वहां के सुरक्षा कर्मियों ने गिरफ्तार कर लिया राही विस्मित था वहां की विज्ञान एवं तकनीक के विकास को देखकर क्योंकि जिस आत्मा के लिए गीता में लिखा है नैनन छिं दंती शष्ट्रानी नैन दहती पावक  उसी आत्मा को इन्होंने कैद कर लिया था तभी वहा एक अधिकारी आया संभवत भारतीय पुलिस अधीक्षक रैंक का होगा उसने कहा है मानव जीव तेरी इतनी हिम्मत......... कहते हुए ऐसा तमाचा मारा कि राहीको लगा कि अगर एक तमाचा और मार दिया तो उसके तो प्राण पखेरू उड़ जायेंगे लेकिन साथ ही वह पुनः विस्मित था कि करोड़ों प्रकाश वर्ष दूर के एक प्राणी जीव को निशसरीर इन्होंने विना कोई परीक्षण पहचान कैसे लिया। राही को लगा फस गया बेटा अब तो बचना मुश्किल है तभी उन्होंने मुझे न्यायालय में पेश किया प्रवेश करते ही मेरी आंखे फटी की फटी रह गईं क्योंकि वहां के न्यायाधीश तो स्वयं धर्मराज थे धर्मराज  अब मुझे लगा कि अन्याय तो नहीं होगा और मैने कोई अपराध भी नहीं किया है।
तभी मेरा नाम पुकारा गया मै सहर्ष कठ घरे में खड़ा हो गया मेरा जीव रोमांचित था कि जिस धर्मराज का मै सिर्फ स्मरण कर सकता था आज साक्षात उसके सामने खड़ा हूं मेरा जी चाहा कि मै उसके चरण स्पर्श कर लू लेकिन तभी  न्यायाधीश महोदय  ने कहा है प्रथ्वी लोक के मानव जीव आप पर आरोप है कि आपने विना आज्ञा स्वर्ग में घुसपैठ करने की कोशिश की है आपको अपनी सफाई में कुछ कहना है? मैंने कहा मेरे प्रभु धर्मराज जी मैंने घुष्पैठ की नीयत से नहीं प्रभु श्री विष्णु के उपदेश परोपकार के वशीभूत होकर प्रवेश किया है तभी वहा के वकील जैना महोदय ने बताया कि नहीं माई लॉर्ड ही इज टेलिंग लाई तभी मैंने कहा नो गॉड आई एम श्योर नोट टेल लाई तभी परमपिता के समान ईशा गॉड ने कहा यू गिव मी एविडेंस? मैने कहा प्रभु मेरे पास इस संबंध में कोई साक्ष्य सबूत नहीं है तभी प्रभु ने कहा कि आप दोषी हो।
                                मैं स्तब्ध था पहली बार भगवान से बहस करते हुए मुझे लगा कि यदि भगवान कह रहे हैं कि मै दोषी हूं तो हीक्योंकि  वो तो भगवान है न फिर क्या था धर्मराज महोदय ने आदेश दिया कि इस आत्मा को नष्ट कर दिया जाए मैं स्तब्ध था दुःखी नही था क्यूंकिप्रथ्वी  लोक पर हमारी सर्वोच्च संस्था हमारी धड़कन पर हमला करने वालो को फांसी देने बीस वर्ष लग जाते है जबकि आज स्वयं धर्मराज ने मुझे छोटे से अपराध के लिए फांसी की सजा दे दी धन्य है न्याय के देवता क्योंकि न्याय हमेशा कठोर होता है ऐसा मै इसलिए सोच रहा था क्योंकि मैं आश्वस्त था कि अब मैं हूं तो स्वर्ग लोक के आस पास ही फ़िर मैने क्या देखा कि ईशा मशीह , विस्नु ,मुहम्मद साहब सहित सभी धर्मो के भगवान उस न्यायालय के सर्वोच्च स्थान पर बैठे हैं तभी एक आवाज़ आई हे मानव आपकी कोई अंतिम इच्छा मैंने कहा हां प्रभु मुझे भगवान के दर्शन करने है तभी वहा के पुलिस अधीक्षक को आदेश देकर धर्मराज जी आपनी कुर्सी छोड़कर चले गए अधीक्षक महोदय ने मुझे कारागार में बंद कर दिया सोचने लगा कि मुझे कई दिवस हो गए हैं प्रथ्वी लोक से आए हुए मेरी मृत वत देह को देखकर न जाने मेरे घरवालों का क्या हाल हो रहा होगा मैने चाहा कि मै एकबार योग शक्ति से वहां जाकर मेरे घरवालों को ये समझाकर आऊ कि ये लफड़ा बहुत लंबा चलेगा और तब तक आप मेरी मृतवत देह को बर्फ में लगाकर रख देना या सुरक्षित रखना क्योंकि यहां पर प्राणी शरीर को जीवन हीन होने पर नष्ट करने की जल्दी में रहता है खैर छोड़िए इन कुटिल परम्पराओं को लेकिन मै देह के बारे में चिंता इसलिए कर रहा था क्योंकी मै आश्वस्त था कि भगवान के अनुसार आत्मा नष्ट नही होती हैं परन्तु धर्मराज द्वारा मेरी आत्मा को नष्ट करने का आदेश दिया है भगवान से मिलकर उन्हें स्मरण दिलाऊंगा  आप के अनुसार आत्मा नष्ट नही होती है तो मुझे क्षमादान देकर भगवान रिहा कर देंगे
 एक तरफ जहां
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                                         लेकिन मेरा योगशक्ति द्वारा प्रथ्वी पर जाने का प्रयास विफल रहा तभी पुनः प्रयास पुनः प्रयास प्रयास पर प्रयास किए लेकिन' ढ़ाक के वही तीन पात, तब मुझे अहसास हुआ कि मै स्वर्ग लोक के कारागार में बंद हूं अं मेरा सिर चकरा गया और मैं  एक कोने में लुढ़क गया तब मुझे अहसास हुआ कि मृत्यु तथा अपनों से विछोह इतना आसान नहीं है अपने आप को योगी मानने वाला मैआज मृत्यु का स्मरण करके ही सिहर रहा हूं मुझे जीवन चक्र का पूरा स्मरण साकार होने लगा मुझे मां का दुलार याद आ रहा था मै एक छोटा सा बच्चा हूं मां मुझे कितने प्यार से रखतीं थी।थोड़ा बड़ा हुआ तो प्यारा ही रहा जब ज्यादा शरारत करता था तो मां मुझे पेड़ से बांध कर धमकी देती थी कि बेटा आज तुझे भोजन नहीं मिलेगा मेरी आंखों के सामने समय चक्र घूम गया बचपन के सातवें साल मै वापस जा चुका था मां ने मेरा नाम भी गोपाल रखा था और मैं हरकते भी गोपाल जैसी ही करता था अंदिनों  मां से बोला गया एक झूठ मुझे याद आ रहा था बात उन दिनों कि है जब मेरे परिवार की आर्थिक स्थिति अत्यंत दयनीय थी ।मां  एक गृहिणी होने के साथ साथ एक कृषक भी थी तथा पिताजी गुजरात की जान सूरत में मजदूरी करते थे मां ने अपने स्वामित्व वाली पांच बीघा जमीन के अलावा आठ बीघा जमीन साझे पर की थी उन दिनों सिंचाई इंजनों को चलाकर की जाती थी पाईप लाईनो का अभाव था क्योंकि दुनिया में दो ही बड़े दामोदर और दाम   खैर सिंचाई के लिए कच्ची मिट्टी की नहर बनाईं जाती थी पानी के ऊंचाई पर जाने पर जब वह नहर टूट जाती थी तो कइयों बार मुझे और मेरी बुआ को उस नहर की दीवार बनना पड़ता था तब मेरी मां अकेली फावड़े से मिट्टी डालकर पुनः उसे बनाती थी एक दिन काफी बक्त होने पर में उस टूटी नहर से अलग हो गया तो मां को गुस्सा आ गया  कौन थी वोजिस काम के लिए पसीना पसीना होकर लगातार दो घंटे से मेहनत कर रही थी वह मेरे हटते ही पानी के तेज बहाव में बह गई थी प्रतिक्रिया में मां ने मुझे एक चांटा मार दिया जिसका अहसास कर मेरे शरीर का रोम रोम आज प्रफुल्लित हो रहा है खैर! मां ने कहा"बेटा आज तेरा खाना बंद" जैसा कि आप जान गए होंगे कि 'भूख मेरी सबसे बड़ी कमजोरी थी' क्यूंकि वो भूख मुझे नैतिकता के साथ पूरी करनी थी लेकिन फैल गया चरित्र मैंने मां से दूर दूर रहकर कहा 'मुझे दस का नोट पाया है फिर क्या था मां का गुस्सा रफूचक्कर प्यार से मां ने मुझे अपने पास बुला लिया तथा मुझे बड़े प्यार से कहा 'ला बेटा'। दस का नोट मुझे दे दे  मैंने कहा नहीं पहले मै खाना खाऊंगा फिर दूंगा मां का आदेश निरस्त हो चुका था मां ने बड़े ही प्यार से मुझे खाना खिलाया फिर कहा  ला बेटा मुझे दे दे दस रुपया  मै मां को पकड़कर एक टीबे के पास ले गया और कहा मां मैने दस का नोट यहां छिपादिया है। इस चूहे के विल में क्या फिर क्या था मां ने चूहे के विल के आसपास यहां तक की विल में भी तलाश किया लेकिन नहीं मिला खैर मिलता भी कैसे जो था ही नहीं वह मिलेगा केसे  तभी मां ने मुस्कराते हुए गोदी में उठाकर मुझे चूम लिया! कोई ये ना समझे कि मेरी मां मुझे प्यार नहीं करती थीं यदि इस दुनिया में सबसे ज्यादा कोई मुझे प्यार कर सकता था तो वह मेरी मां ही थीं खैर  मां ने समझाया बेटा इस तरह झूट बोलकर कुछ भी प्राप्त करना पाप हैं लेकिन मै आज तक वैसा ही हूं
समय चक्र आगे चला अप्रैल १९९५ का मनहूश दिन आया घटना इस प्रकार घटी मां ने ८ भाई बहनों को पालते हुए एक भैंस के कुछ किलो दूध में से अपने हिस्से का घी स्वयं का गला काट कर पास के एक सूदखोर व्यक्ति को बेचा था यद्यपि मै दो भाई बहनों से छोटा था लेकिन एसे बाहर के काम मुझे ही देखने पड़ते थे चूंकि मुझे स्कूल के शिक्षक ने सरकारी फीस जमा न करने पर धमकाया था क्योंकि मेरे महान भारत में ये आम बात है। खैर  मां ने कहा बेटा घी वाले से पैसे ले आना  मै दूसरे दिन सुबह बिस्तर से उठा  तथा चल दिया घी के पैसे लेने उस सूदखोर ने मुझे दो किलो घी के १०० रुपए दे दिए। अब क्या था मैं गरीब रथ की तरह सफर करता हुआ पहुंच गया अपने गाव केपास तभी मेरे ताऊ का लड़का आ धमका और बोला और बॉस कहा से आ रहे हो' मैने टपकत से उत्तर दिया जैसे मै करोड़ों का उधार उगाह कर आ रहा था फ़िर क्या था उसने बीस रुपए मांग लिए मैने स्पष्ट लहजे में मना कर दिया उसने मुझे मारा पीटा तो मै पहुंचा अपनी मां के पास जब मां ने यह सब सुना तो वह उबल पड़ी और गाली गलोंच कर दी स्वाभाविक था क्योंकि सागर में कोई उसके जीवो को नुक्सान पहुंचाने के लिए कोई बम विस्फोट करेगा तो सागर क्या चुप बैठेगा?उसी  प्रकार मां की ममता का सागर मचल गया था समुद्री सीमा के अन्य जीवो को नुकसान हो जाने के भय से वह अपनी लहरे सीमा तक समेट कर शांत हो गया
                          मां शांत होकर गाय के बछड़े को पानी पिला रही थी तथा साथ ही साथ अपने बाल भी धो रही थी तभी अचानक ताऊ,ताई और उनका पुत्र तीनों ने निरीह मां पर ताबड़तोड़ लाठियों से प्रहार कर दिया मां को गश आ गया मै कुछ समझ नहीं पा रहा था तभी वो लोग मेरे बड़े भैया के पीछे दौड़ पड़े भई पास ही एक टूटे हुए दरवाजे के पीछे छिप गया था और किवाड़ बन्द कर लिया उस दिन अल्पायु मै ही मैने कुदरत का करिश्मा देखा था वो तीनो लोग किवाड़ को तोड़ने का भरपूर प्रयास कर रहे थे परन्तु किवाड़ नही खोल पाए ख़ास बात कीबदकि बन्द करने के लिए अंदर कोई सिटकनी या सांकल भी नहीं थी अंतत जूझकर देत्यो का गुस्सा शांत हुआ और वे घायल अवस्था में तड़पती हुई मां को एक एक लाठी मारकर चले गए
हम सब भाई बहन मां के पास थे मां लहूलुहान थीं वह खड़ा होने का प्रयत्न नहीं कर पा रही थी मुझे ऐसा लग रहा था जैसे प्रकृति भी आज हम से क्रुद्ध है मुझे गाय भैंस पशु पक्षी से भीडर लग रहा था लग रहा था कि अभी कोई ब्रक्ष टूटकर गिरेगा और हम सब उसके नीचे दब जायेंगे नजरनउठाकर आसमान की तरफ देखा तो लगा कि आसमान गिरने वाला है दोस्तों मुझे उस दिन पता चला कि जब आप का स्नेहजन पीड़ित हो तो कैसा लगता है।वास्तव में मुझे दिन में तारे दिख रहे थे
तभी आवाज़ आई अधीक्षक महोदय ने कहा आपको भगवान के दर्शन करने के लिए चलना है। मेरी तंद्रा भंग हुईसामने  भगवान थे मैने क्या देखा वह एक होलोग्राम के समान थे। यहां से देखो कृष्न,यहां से देखो ईशा मशीह वहा से देखो पैगंबर मोहम्मद महात्मा बुद्ध सारे  धर्मो के भगवान एक ही आकार में  मैने कहा प्रभु तुम एक हो फिर अलग अलग स्थान से देखने पर अलग अलग क्यों दिखते हो ! प्रभु ने कहा' है मानव जीव यही तो मानव जीव का भ्रम हैं। जिसे मेरी मया कहते है इन्द्र धनुष एक रंग होने के बाद भी सतरंगी दिखाई देता है यह मानव की मूल भूत प्रकृति है मैने प्रभु के चरणों में बंदन करना चाहा परंतु प्रभु ने रोकते हुए कहा कहो क्या कहना चाहते हो  मैने कहा प्रभु आपने कहा है कि आत्मा नष्ट नहीं होती प्रभु ने बीच में ही बात काटते हुए कहा न्यायपालिका सर्वोच्च है और चूंकि आपने क्षमादान नहीं मांगा मुझसे भेंट मांगी थी इसलिए आपको क्षमा नहीं किया जा सकता है  हां तेरी फांसी आज नहीं कल होगी मैने सोचा कुछ देर और प्रभु को बातो में उलझाता हूं हो सकता है वो मुझे क्षमा कर दे मैने कहा प्रभु ये स्वर्ग है और सर्वोच्च आपका शाशन है फिर आपकी स्वर्गीय जनता त्राहि त्राहि करके क्यों रो रही है।प्रभु  ने कहा हे मूर्ख जो जैसा करेगा वो वैसा भरेगा  लेकिन चूंकि आज हमें ओर भी कम है इसलिए कल बात करते है और हां आपकी आत्मा को नष्ट करने से पहले हम ये भी बताएंगे रात्रि हो चुकी मुझे नींद नहीं आ रही थी क्योंकि शरीर हीन था नींद शरीर को आती हैं आत्मा को नहीं मैने सोचना प्रारंभ किया आखिर ये भगवान होकर भी मेरी आत्मा को नष्ट कैसे कर सकते हैं ये कोई स्वप्न तो नहीं देख रहा हूं  नही मृत्यु निश्चित थी वो भी आत्मा की मै सिहर उठा अब मेरी हालत उस एड्स रोगी की तरह थी जो मृत्यु की तिथि निश्चित होने पर अपनी उस एक भूल के लिए पछताता है जो उसने अपनी पत्नि से गद्दारी करके की थी वो भी पल पल मरता है और मैं भी हर पल मर रहा था पत्नि के जिक्र से मेरी सोच मुझे मेरी पत्नी की तरफ मुड़ गई थी याद है जब मै समय के काल चक्र में फंसा और पुनः पहुंच गया उस लोक में जहां कभी कालिदास जैसे श्रंगार रस से परिपूर्ण कवि हुए थे  शकुंतला यह नाम सब जानते है मेरी भी शकुन्तला उसी प्रकार समय के थपेड़ों में उलझती रही जिस प्रकार दुष्यंत की शकुन्तला उलझी थी।
    शादी के बाद मैने देखा कि वह दिल की बहुत अच्छी थी पवित्र निर्मल गंगा यमुना की तरह लेकिन संवेगो पर उसका खुद का नियंत्रण नही था उसका कारण मैने खोजना चाहा तो मैने अपनी खोज में पाया कि उसे न कभी मां का प्यार मिला न बाप का,न भाई का प्यार मिला न बहिन का उसके पैदा होते ही उसे फेंक दिया गया ननिहाल जहां उसे एक ही स्त्री से मिला भाई बहन मां का प्यार बाकी सब लोग तो उसे मां के प्यार का उलाहना देते थे। जब वह अपनी सहेलियों में होती तो उसे उसकी सहेली बताती मेरी मां मुझे ये लाई वो लाई तो वो भी सोचती काश! मेरी मां  फिर कभी कोई सहेली को उसकी मां लाद लड़ाती तो वह सोचती काश! मेरी मां ये वह अवस्था थी जिसे उत्तर बाल्यावस्था कहते है संवेग नियंत्रण की कला इसी की देन होती हैं और यही शुरू हुआ द्वंद्व  कुंठा बना तथा वही कुंठा संवेग ध्वंस्ता की स्थिति में पहुंच गई एक लड़की को नियंत्रित दशाओं में पाला पोसा जाता है। तो उसके बहुमुखी व्यक्तित्व का विकास संभव नहीं है।जिस परिवार में उसका बचपन गुजरा वह परिवार स्त्री के लिए संवेदन हीन था वह जब विद्यालय में हुआ करती कोई लड़की को देखती जो विद्यालय में अपने मां की गोद से उतरी थी सोचती काश मेरी मां यही काश मेरी मां एक  दिन पराकाष्ठा पर तब पहुंची जब वर्षों ननिहाल के बाद एक बेटी अपने घर लौटती हैं तो उसकी मां उसे लाड लड़ाने के बजाय कहती हैं कि तेरे पैदा होते ही मेरा भाग्य अस्ट  हो गया क्या बच्चा समझता नहीं है अरे ये बच्चा है सब जानता है इन सभी का मिला जुला रूप मुझे मिला था औसत गुणों वाली औसत दोषों वाली तथा एक उसकी खासियत जो मुझे बेहद पसंद थी मुझसे कुछ भी न छुपाने वाली औसत लेकिन मेरे लिए सर्वोत्तम उम्र के साथ
उम्र के साथ इंसान का विकास होता है टीन एजर्स के साथ समायोजन कर लेना भी युद्ध जीतने के बराबर होता है उसका न अपना कोई सम्मान था न अपमान वह एक बात कि मै ग़लत नहीं हूं  को साबित करने के लिए तीन साल संघर्षरत रहीं लेकिन उसे कोई उसे उसके अंदर झांककर पढ़ नहीं पाया वह गलत नहीं थी क्यूंकि प्रत्येक रात्रि में उसकी आंखो से गिरे हुए तप्त आंसू जिसे ये समझा सके वह कोई और नहीं था वह चाहतीं थी जो एक किशोर और किशोरी चाहते हैं कि उसके द्वारा किए गए कार्य को सामाजिक स्वीकृती मिले या किसी बुजुर्ग की सहमति मिले, तो क्या ग़लत चाहतीं थी वो खैर काश मेरी मां की झनझनाहट से मै पुनः उस काल कोठरी में घुटन महसूस कर रहा था  लेकिन मै अपने आप को स्वतंत्र करने का विफल प्रयास भी नही करना चाहता था

                                                                                          अगले दिन प्रभु कि सभा लगी थी प्रभु ने कहा हे मानव जीव ध्यानपूर्वक सुन मेरे राज्य में क्रंदन का कारण ये है कि यह स्वर्ग नारी विहीन हो गया है समय रहते इन्द्र ने काफी प्रयास किए थे लेकिन तब इनकी समझ में नहीं आया था। देखता नहीं पिछले दो सो वर्ष से कोई नया देवता नहीं आया है।क्यूंकि  स्त्री समाप्त हो चुकी है और कोई भी नर विना मादा के संतानोत्पत्ति नही की जा सकती हैं मुझे हंसी आ गई प्रभु आप पूरी सृष्टि के नियंता है तो क्या आप पुनः नारी उत्पन्न नहीं कर सकते प्रभु ने शख्त लहजे में कहा मूर्ख मानव जीव सिर्फ एक ग्रह पर एक ही बार एक ही स्त्री पुरुष उत्पन्न कर सकता हूं मैने बात को संभालते हुए कहा पर प्रभु आजकल तो वैज्ञानिक टेस्ट ट्यूब बेबी बनाकर भी दुनिया की उत्पत्ति कर सकते हैं इतना सुनना था प्रभु नाराज हो गए बोले ठीक है तुझे दो दिन का वक्त देता हूं यदि तूने इसे संभव कर दिखाया तो तुझे क्षमादान ही नहीं इस लोक का राजा बना दूंगा और तुझे जो भी वैज्ञानिक चाहिए यमराज से कहकर यहां बुलबा लेना।यानी कि दो दिन के लिए स्वर्ग के लोकतंतरात्मक शासन के प्रधान मंत्री खैर बात बड़ी आसान थी मेरी तो वो हालत हो गई कि  चुपड़ी और दो दो मैने उस दिन विश्राम करने के बजाय उसी दिन से कार्य करना प्रारंभ कर दिया। एम
मुझे यकीन नहीं था कि स्वर्ग का शासन भारत के शासन से भी उदार है भारत में तो देश की इज्जत पर हमला करने वाले या यू कहे कि पूरी तरह जार जार करने बाले को माफ भर ही किया जाता है लेकिन प्रभू ने तो मुझ घुसपैठिए को दो दिन का वास्तविक प्रधानमन्त्री बना दिया था।
अब क्या था मैने सारी सरकारी मशीनरी को लगा दिया बात  आई मिशन का नाम क्या होगा तो  mission Beti mission Laxmi mission fala miss mis dhika    लेकिन मैने पिछली जानकारी मांगी तो पता चला कि वहा तो पहले से ही इस तरह के १००८ मिशन चल रहे थे तभी मुझे पता चला कि संत पुरुष इसलिए १००८ अपने नाम से पूर्व लगाते थे खैर मसला ये नहीं मसला था मिशन का नाम क्या होगा मैने सभी की राय जानकर यह तय किया कि इस मिशन का नाम होगा' मिशन हनीमून, चारो तरफ से तालियों की गड़गड़ाहट ने मेरा मनोबल को पुष्ट कर दिया था। अब प्रारंभ हुआ मिशन हनीमून मैने सर्वप्रथम प्रथ्वी लोक से सताधिक सर्व श्रेष्ठ डॉक्टरों को स्वर्ग लाने का आदेश दिया मैने आदेश क्या दिया जिसका नाम लेता वही हाजिर मै अचंभित था और खुश भी क्योंकि जहां तक मुझे मालूम था सबसे तेज वेग प्रकाश की तरंगों का था लेकिन गलत था क्यूंकि भारतीय मनीषियों ने मन के वेग को सबसे तीव्र करार दिया जा चुका था। और वह  आज साबित भी हो रहा था इसलिए मै खुश था तथा मैने
डॉक्टरो को निर्देश दिया कि तुरंत प्रभाव से मिशन हनीमून पर कार्य प्रारंभ किया जाए।और उन्हें जैसी भी प्रयोगशाला चाहिए वेसी प्रयोगशाला तुरंत उपलब्ध कराने के निर्देश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी निदेशालय को जारी किया। फिर क्या था डॉक्टरों की सरजनशक्ती से भी परे प्रयोगशाला देखते ही देखते बनकर तैयार हो गई।
अब मैं भी प्रयोगशाला में बैठकर डॉक्टरों का सहयोग करने के लिए पूरे मनोयोग से तैयार था डॉक्टरो ने प्रयोगशाला को गुणवत्ता पूर्ण करार दिया और मुझे विश्वास दिलाया किअब हम यहां ५०००० टेस्ट ट्यूब बेबी तेयार कर सकते हैं मै बड़ा खुश था यह दोहरी खुशी थी एक तो स्वर्ग लोक का राजा बनने की तथा दूस री जगत के रचियता के लोक की पुनर्रचना करने कीमैने आदेश दिया तुरंत कार्य प्रारंभ किया जाए क्यूंकि मै एक लोक कथन से पूरी तरह प्रभावित था काल करे सो आज कर आज करे सो अब लेकिन तभी डॉक्टर केडी ने कहा श्रीमान जी हमे अंड व सुक्र की आवश्यकता है मैने आदेश दिया कि तुरंत अंड ब सुकर उपलब्ध कराया जाए मैने तुरंत पूरी मशीनरी को शुक्र संग्रहण में लगा दिया तथा अंड की समस्या के निस्तारण हेतु बैठक बुलाने को कहा अफसोस कोई भी शुक्र देने हेतु तेयार नहीं था क्योंकि उन्हें देव धर्म खंडित होने का भय था मैने बैठक में सर्वसम्मति से राष्ट्रीय आपातकाल लगाना चाहा लेकिन प्रभु ने ऐसा करने से मना कर दिया क्योंकि ये उनके मूल अधिकार के हनन का मामला था मै बेचारा लाचार प्रधानमन्त्री मेरी हालत लोकतांत्रिक देश के प्रधानमंत्री की तरह हो गई मन बिचारा परेशान था आशा थी कोई मोहन आएगा लेकिन समय रूपी सिंह ने राजा को चापलूस बना दिया था मेरी स्थिति किंकर्तव्यविमूढ़ की सी थी मुझे मेरे दोनों सपने एक बार फिर टूटते हुए नजर आ रहे थे और ऐसा लग रहा था जैसे मौत रूपी मकर मेरी गर्दन पर अपनी पकड़ मजबूत करता जा रहा था लेकिन मैने अपने मंत्रियों से सलाह मशविरा लेकर यह तय किया कि मै स्वयं जनता के बीच जाकर उन्हें कुछ प्रलोभन देकर समस्या का समाधान निकालना चाहिए
अगले दिन ही मैने सभा बुलाई मै मंच से भाषण देने लगा' हे स्वर्गलोक की महान आत्माओं  मुझे प्रभु ने आपकी समस्याओं को सुलझाने हेतु नियुक्त किया है भाइयों बहनों आपको विश्वास दिलाता हूं कि तभी कोई चिल्लाया अरे ये बहन किसको बोल रहा है में ठहरा भारतीय सो मेरे मुंह से निकाल खैर मैने माफी मांग ली पुनः मैने अपना भाषण जारी रखा आप बताओ पिछले दो सौ साल में यदि पहले की सरकार चाहती तो क्या यह समस्या रह सकती थी नही न क्या यह समस्या खत्महोनी चाहिए कि नहीं क्या एक एक को तीन तीन पत्नियां मिलनी चाहिए कि नहीं अब मै आपको विश्वास दिलाता हूं कि मै आपकी समस्या स्त्रियों का अभाव को ऑपरेशन हनीमून के द्वारा दूर कर दूंगा हालांकि वो लोग मुझे जिंदा नहीं छोड़ेंगे परन्तु मै उनसे डरता नहीं हूं अरे मेरा क्या उखाड़ लेंगे मै तो योगी हूं योगी मैने अपना तन मन सबकुछ आप के लिए छोड़ा हैं और हां यहां मै एक बात और बता देना चाहता हूं कि जो अपना स्पर्म देगा पहली लड़की भी उसी को मिलेगी साथ ही सरकार की तरफ से उसे ५०००० का इनाम भी दिया जाएगा धन्यवाद तालियों की गड़गड़ाहट के बीच मेरे जयकारे लगाए जाने लगे
                                           
   फिर क्या था मेरी घोषणा के साथ ही शुक्र दाताओ की भीड़ इतनी बढ़ गई कि मुझे पूरे प्रशासन को उन्हें नियंत्रित करने के लिए लगाना पड़ा लोग लाइन में लगे रहे पूरा दिन गुजर गया लेकिन शाम होते ही प्रभु ने मुझे बुलाया और कहा कि हे मानव जीव आप हमारी समस्या नहीं सुलझा सके मैने प्रभु के समक्ष अपनी प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की तथा प्रभु से कुछ समय मांगना चाहा तभी प्रभु क्रोधित होकर बोले हे मूर्ख मानव ऐसा अगर किसी भी लोक में होता हो समय निश्चित होने के बाद उसे बढ़ाया जा सके तो मै तेयार हूं फ़िर क्या था मैने अपनी भारत भूमि का उदाहरण प्रस्तुत किया जहां किसी भी कार्य को करने की कोई समय सीमा नहीं होती हैं                                                               नंबर एक- प्रभु इंग्लिश भाषा १५ वर्ष तक रहनी थी परन्तु लेकिन आज ७१ वर्ष बाद भी वह संवैधानिक भाषा है
नंबर दो- प्रभु हमारे देश में आरक्षण १० वर्ष के लिए था लेकिन ७१ वर्ष बाद आज भी है
नंबर तीन- प्रभु हमारे देश में बच्चा भी निश्चित समय पर पैदा नहीं होता कोई ६ महीने तो कोई १० महीने में होता है प्रभु ने मेरे तर्को से सहमत होकर मुस्कराते हुए मुझे एक माह का समय दे दिया लोग  अभी भी शुक्रदान हेतुलाइन में लगे थे रात भर खिड़की बन्द लेकिन लोग लाइन में लगे रहे डॉक्टरों ने शुक्र संग्रहण के भंडारण में असमर्थता जाहिर करते हुए शुक्र दान पर रोक लगा दी फिर क्या था पूरे स्वर्ग में लोग आक्रोशित हो गए जगह जगह हिंसक प्रदर्शन होने लगे पूरे स्वर्ग में अराजकता फैल गई। कोई कहता की५०००० में १०००० ही मुस्लिम है कोई कहता ईसाई तो बिल्कुल नहीं है कोई कहता वोधद तो १००० ही है प्रधानमंत्री हिन्दू हैं न इसलिए अपनी आबादी को ही जिंदा रखना चाहता है इसलिए ही उसने सिर्फ हिन्दुओं का शुक्रदान स्वीकार किया है हम हरगिज ऐसा नहीं होने देंगे फिर आई काली स्याह रात जिसमें सांप्रदायिक दंगे भड़क उठे थे खुद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए रात भर दौरा करता रहा लेकिन जहां मै जाता वहां सिर्फ लाशों के ढ़ेर ही नजर आते कुछ लोग बुरी तरह घायल होने के बावजूद एक दूसरे को मारने काटने पर उतारू थे पता नहीं उनके अंदर का जमीर क्यों और कब मर गया था
खैर पूरी मशीनरी झोंकने के बावजूद में स्वर्ग को बर्बाद होने से नहीं बचा सका था। द्वीप की आधी आबादी समाप्त हो चुकी थी मैंने घोषणा की कि स्पर्म का पुनः संग्रहण किया जाए तथा प्रतेक धर्म के व्यक्तियों का उसके अनुपात में शुक्र संग्रहण किया जाए इस फार्मूले को आनुपातिक शुक्र संग्रहण धर्मारक्षण फार्मूला  कहा गया तब जाकर कहीं स्थिति नियंत्रण में आ सकी लेकिन फिर भी छिटपुट घटनाएं जारी थी। इस बार प्रभु ने मुझे खूब खरी खोटी सुनाई अगले दिन की शुरुआत के साथ ही स्पर्म दाताओं की भीड़ पुनः बढ़ने लगी मैने डॉक्टरों के सुझाव पर १००००नर्सिंग  सहायकों को भी ऊपर बुला लिया था अब  काम जल्दी से निपटने लगा था तथा मैने मंत्रालय को सख्त निर्देश दिए कि सभी शुक्र दाताओं का शुक्र संग्रहण किया जाए।चाहे वह हमारे कोई काम नहीं आवे अब एक नई समस्या उत्पन्न हो गई कोई ५००० की रिश्वत देता तो कोई ५०००० की कोई कोई ५ लाख की अब सिर्फ पैसे वाले और रशुखदारो का शुक्र संग्रहण नर्सिंग कर्मियों द्वारा किया जाने लगा मुझे  स्थिति का पता चला तो मैने गरीबों को पचास प्रतिशत आरक्षण लागू कर दिया फिर अपहिजो को बीस प्रतिशत अन्य को बीस प्रतिशत विशेष अन्य को पांच प्रतिशत आरक्षण लागू कर दिया।एक भ्रष्ट तंत्र की स्वर्ग में स्थापना करने का श्रेय मुझे ही जाता है आजकल यह प्रतियोगी परीक्षाओं में भी  पूछा जाने लगा है
समय तीव्र गति से चल रहा था प्रभु द्वारा दिए गए समय में सिर्फ १५ दिन शेष थे लेकिन समस्या अभी भी जस की तस बनी हुई थी क्यूंकिअंड दान कौन करेगा क्यूंकि स्त्रियां तो पूरी तरह समाप्त हो चुकी थी। काफी प्रयासो  के बाद मै एक निष्कर्ष पर पहुंचा की अंड उत्पन्न करने पर कार्य किया जाए। अंत में प्रभु की कृपा से प्रयोग सफल हुआ और डॉक्टरों ने अंड का आविष्कार कर लिया था स्त्री उत्पन्न करने का स्वप्न साकार होने लगा था। समय की समाप्ति के बाद मैने प्रभु से कहा प्रभु मैने अपना बादा पूरा कर दिया है।५०००० टेस्ट ट्यूब बेबी तेयार हो चुके हैं उसमे भी मादा ही उत्पन्न करने में हमारे बैज्ञानिको के सफलता हासिल की है।प्रभु  मुस्कराने लगे कि अब स्वर्ग के स्थाई प्रधानमंत्री तुम ही रहोगे प्रभु के इस बरदान से मुझे बड़ी खुशी हुई। समय बीतता गया नौ माह बाद पचास हजार बालिकाओं का जन्म हुआ पूरे स्वर्ग लोक में उत्सव की सी खुशी मनाई गई।कन्या वितरण को लेकर भारी धांधली हुई मेरी पूरी फजीहत हो चुकी थी मेरी देखरेख में भी अधिकारी बर्ग पता नहीं कैसे कैसे कुक्रत्यो को अंजाम देने में सफल हो गए थे। समय चक्र घूमता गया पांच साल के बाद सर्वे कराया तो पता चला कि आधी से ज्यादा कन्याए उनके पोषको द्वारा उपभोग कर कर के समाप्त कर दी गई थी पुनः पांच वर्ष बाद जनगणना के आंकड़े घोषित करते ही कन्याए छीनने के लिए ग्रह युद्ध शुरू हो चुका था कर्फ्यू के बाद भी लोग मर रहे थे दंगे भड़क रहे थे मेरी ही आंखो के सामने कन्यायो को काटा जा रहा था उनकी चीत्कार और सिसकियां सुन सुन कर मैं घायल हो चुका था मेरे सारे सैनिक मारे जा चुके थे।मेंअपना  सर्वस्व समाप्त कर चुका था एक द्वीप के विनाश की जिम्मेदारी लेकर मेरी आत्मा मुझे दुत्कार रही थी तथा मुझे मांगने पर भी मौत नहीं मिल रही थी यह स्थिति मेरे लिए उससे भी दर्दनाक थी। जब मुझे सजा ऐ मौत दी गई क्यों इंसान इतना स्वार्थी हो गया अगर समय रहते टेना टेनियास द्वीप बासी अगर अपनी कण्यायो का बध नहीं करते तो आज मै इस सुनसान द्वीप पर नहीं होता।जहां  कभी जीवन था
पूरी तरह जीर्ण शीर्ण आत्मा को लेकर प्रभु के पास गया प्रभु से बात करनी चाही तो प्रभु ने कहा जिसे नष्ट होना होता है वह नष्ट होकर रहता है इसमें तेरी कोई गलती नहीं है हम तुझसे प्रसन्न है मांग क्या मांगता है?मैने कहा प्रभु मेरी जीव आत्मा को नष्ट कर दो क्यूंकि मै अब और जीना नहीं चाहता हूं। लेकिन प्रभु ने ये कहते हुए चेताया कि कुछ समय बाद आर्यावर्त की भी यही हालत होने वाली है अगर बचा सकता है तो बचाले सिहर उठा मै जोर जोर से कांपने लगा तभी मुझे मेरे पत्नि ने झिंझोड़ मै जाग गया लेकिन मेरे माथे पर पसीना व दिल में वह विभिषक दृश्य अभी भी मौजूद था सिर्फ यही बड़बड़ाता रहा ऑपरेशन हनीमून हनीमून  हनीमून

Story in Hindi एक तरफ जहां

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ मेरा भारत महान

7 comments:

Akg said...

This is my first Post if you wants I will continue if you rejected I will stop this so plz tell me आपको मेरी कहानी में कुछ भी अच्छा लगता है तो मुझे बताए जरूर ताकि मैं लिखू सुधार के सुझाव जरूर दे thanks

Urcivilstation said...

Very beautiful sir..keep writing..aapke andar ek bahtarien kavi and writer chupa hai aaj pata chala..great sir..👍👍

Unknown said...

Superb..........Aapki kala ....kabil e tareef hai bhai.....really splendid ....

Anuj Sogarwal said...

Very nice. You are drawing your thoughts in our imaginations. Keep it up 👍 Gopalji. Anuj Sogarwal.

Gopal Singh Gurjar Bso Roopwas said...

Sir i am really impressed ur coment

pmkishan said...

Brother is a wonderful creation

Ranoo said...

Keep it on sir